जानिए कितने विवादों से जुड़े थे पंजाब के नए मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चिन्नी ?

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Charanjit Singh Channi
Charanjit Singh Channi

पंजाब में कांग्रेस के नए मुख्यमंत्री और राज्य में दलित राजनीति के ‘नए चेहरे’ चरणजीत सिंह चन्नी ने किसी समय कांग्रेस के खिलाफ विद्रोह किया है। 2007 के विधानसभा चुनावों के दौरान, चन्नी ने कांग्रेस के आधिकारिक उम्मीदवार मनमोहन सिंह के खिलाफ निर्दलीय के रूप में चमकौर साहिब निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ा और पहली बार विधानसभा जीती। उस समय, चन्नी का चुनाव चिन्ह एक हवाई जहाज था।

2010 में कैप्टन अमरिंदर सिंह चन्नी को कांग्रेस में वापस लाए। चन्नी पूरे एक साल कांग्रेस में रहे। 2011 में शिरोमणि अकाली दल से बेदखल हुए मनप्रीत बादल ने जब एक नई पार्टी पीपल्स पार्टी ऑफ पंजाब (पीपीपी) बनाई, तो चन्नी उनके करीब हो गए, लेकिन उन्होंने कांग्रेस पार्टी नहीं छोड़ी। 2012 के विधानसभा चुनाव से पहले, चन्नी ने राजस्थान के कांग्रेस नेता सीपी जोशी के माध्यम से राहुल गांधी से मुलाकात की और उनके करीब हो गए।

चन्नी ने तब से पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने 2012 और 2017 का चुनाव चमकौर साहिब सीट से कांग्रेस के टिकट पर लड़ा और विधायक बने। चन्नी 2012 से 2017 तक पंजाब में शिअद-भाजपा सरकार के दौरान विधानसभा में विपक्ष के नेता भी रहे। दूसरी ओर 2012 के विधानसभा चुनाव में पीपीपी का प्रदर्शन खराब रहा और उसके बाद मनप्रीत बादल ने अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय कर दिया।

प्रताप बाजवा के खिलाफ कैप्टन का समर्थन

जब कैप्टन अमरिन्दर सिंह और उनके खेमे ने 2015 में पंजाब कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा को अपदस्थ करने का अभियान चलाया तो चन्नी ने खुल कर कैप्टन का समर्थन किया। चन्नी कभी कप्तान के खास लोगों में से एक था, लेकिन धीरे-धीरे दोनों के बीच दूरियां बढ़ती गईं और चन्नी कप्तान के खेमे को छोड़कर सिद्धू के खेमे में पहुंच गया।

पार्षद के साथ शुरू हुआ राजनीतिक जीवन

चन्नी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत रोपड़ जिले के खरड़ नगर पार्षद पद के लिए चुनाव लड़कर की थी। वे वहां तीन बार पार्षद बने और कभी खरड़ नगर परिषद के अध्यक्ष रहे।

महिला आईएएस अधिकारी से विवाद

2017 में जब कैप्टन अमरिंदर सिंह ने चन्नी को अपनी कैबिनेट में शामिल किया तो उन्हें पंजाब में दलित राजनीति का नया चेहरा माना जाने लगा। चन्नी ने अक्टूबर 2018 में तब सुर्खियां बटोरीं जब पंजाब की एक महिला आईएएस अधिकारी ने चन्नी पर गलत संदेश भेजने का आरोप लगाया।

इससे उनकी छवि धूमिल हुई है। कुछ महीने पहले जब चन्नी नवजोत सिंह सिद्धू कैंप में शामिल हुए और कैप्टन के खिलाफ बगावत की तो उनके खिलाफ यौन शोषण के मामले को फिर से खोलने का प्रयास किया गया। हालांकि बाद में मामला आया और चला गया।

सरकारी आवास तोड़े जाने पर यूटी प्रशासन से विवाद

कैप्टन की सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में चरणजीत चन्नी ने चंडीगढ़ में अपने आधिकारिक आवास के प्रवेश द्वार को तोड़ दिया था क्योंकि यह वास्तु शास्त्र के अनुसार नहीं था। इस बात को लेकर उनका चंडीगढ़ यूटी प्रशासन से लंबा विवाद था। इस संबंध में चन्नी की भी आलोचना की गई क्योंकि उनके पास पंजाब में तकनीकी शिक्षा जैसा विभाग था। फिर पूछा गया कि अंधविश्वास में विश्वास रखने वाला व्यक्ति तकनीकी शिक्षा जैसे विभाग को कैसे संभाल सकता है।

सुखबीर से चर्चा पर एक चुटकुला

2012 से 2017 तक शिअद-भाजपा सरकार के दौरान चन्नी विधानसभा में विपक्ष के नेता थे। फिर एक सत्र के दौरान तत्कालीन उपमुख्यमंत्री श्री सुखबीर सिंह बादल और श्री चन्नी सदन में अपनी-अपनी पार्टी सरकारों की उपलब्धियों पर चर्चा कर रहे थे। फिर सुखबीर ने पूछा कि आपकी सरकार ने क्या किया? तो चन्नी ने कहा कि उनकी सरकार ने पूरे पंजाब में सड़कों को पैच कर दिया है। इसके लिए उसने उसका मजाक उड़ाया।

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