हरियाणा की तर्ज पर पंजाब भी लाएगा निजी व सरकारी नौकरियों में स्थानीय लोगों को आरक्षण का कानून

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पंजाब सरकार (Punjab Government) हरियाणा सरकार की तर्ज पर सरकारी व प्राइवेट नौकरियों में आरक्षण (Private Jobs) का कानून लाएगी. मुख्यमंत्री चरणजीत चन्नी (Chief Minister Charanjit Channi) ने यह ऐलान करते हुए कहा है कि इस कानून को जल्द ही पारित कर इसकी अधिसूचना जारी की जाएगी. सीएम का कहना है कि पंजाब में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता के आधार पर तरजीह दी जानी चाहिए. इस मामले को कल होने वाली कैबिनेट बैठक में भी लाया जा सकता है.

उन्होंने कहा कि रोजगार सृजन पर वह विशेष रूप से उनका मुख्य फोकस क्षेत्र है. सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में स्थानीय लोगों के लिए रोजगार सुनिश्चित करने के लिए सरकार हरियाणा की तर्ज पर कानून ला रही है. यह देखा गया है कि हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली के उम्मीदवार स्थानीय लोगों की नौकरी में कोटा निर्धारित करते हैं. उन्होंने कहा कि मेरी योजना हरियाणा द्वारा पारित कानून से बेहतर कानून लाने की है.

हरियाणा सरकार द्वारा निजी नौकरियों में स्थानीय लोगों के लिए 75 प्रतिशत आरक्षण देने वाले कानून को अधिसूचित कर दिया है. हरियाणा सरकार की अधिसूचना कहती है कि स्थानीय उम्मीदवारों का रोजगार अधिनियम, 2020, जो निजी क्षेत्र की नौकरियों में स्थानीय लोगों के लिए एक कोटा प्रदान करता है, जो प्रति माह 50,000 रुपये से कम वेतन प्रदान करता है. राज्य में 15 जनवरी, 2022 से लागू किया जाएगा. हालांकि इस अधिसूचना के बाद इस कानून का निजी कंपनियां लगातार विरोध कर रही हैं और गुरुग्राम से पलायन करने की चेतावनी दे रही हैं.

भारतीय उद्योग जगत ने इस कानून पर फिर से विचार करने का आह्वान किया और कहा कि इससे बहुराष्ट्रीय कंपनियां राज्य से बाहर चली जाएंगी. उद्योग निकायों ने तर्क दिया कि आरक्षण प्रतिस्पर्धा को नुकसान पहुंचाता है और राज्य सरकार स्थानीय भर्ती को बढ़ावा देने के लिए उद्योग को 25 प्रतिशत सब्सिडी दे सकती है. अधिनियम में राज्य में निजी कंपनियों, समाजों, ट्रस्टों और साझेदारी फर्मों को शामिल किया गया है. बताया जा रहा है कि निजी कंपनियां मामले में अदालत का भी रुख कर सकती हैं.

पीएचडीसीसीआई ने कहा 75 प्रतिशत आरक्षण के कारण प्रौद्योगिकी कंपनियां, ऑटोमोटिव कंपनियां, खासतौर से बहुराष्ट्रीय कंपनियां बाहर चली जाएंगी, ये अत्यधिक कुशल कार्यबल पर आधारित कंपनियां हैं. पीएचडीसीसीआई के अध्यक्ष प्रदीप मुल्तानी ने कहा कि राज्य सरकार स्थानीय भर्ती को बढ़ावा देने के लिए उद्योग को 25 प्रतिशत सब्सिडी दे सकती है. ऐसे में पंजाब में भी इस तरह का कानून लाना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है.
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