संयुक्त किसान मोर्चा की सफाई- चुनाव लड़ने वाले किसान संगठनों से नहीं है कोई लेना-देना

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विधानसभा चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं। इस बीच संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) का हिस्‍सा रहे 25 किसान संघों ने भी चुनावी मैदान में उतरने का ऐलान किया है। उम्मीद है कि ये संघ आम आदमी पार्टी से गठबंधन कर सकता है। इसके बाद से पंजाब की सियासत गरमाई हुई है। साथ ही बीजेपी AAP पर किसानों को भड़काने और जानबूझकर आंदोलन करवाने का आरोप लगा रही। हालांकि मामला बढ़ता देख संयुक्त किसान मोर्चा ने भी इस पर सफाई जारी की है।

मामले में शनिवार शाम संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने स्पष्टीकरण जारी किया। अपने बयान में मोर्चा ने कहा कि पंजाब के कुछ किसान संगठनों द्वारा विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए ‘संयुक्त समाज मोर्चा’ बनाने की घोषणा की गई है, लेकिन उनका इससे कोई लेना-देना नहीं है। एसकेएम किसी भी राजनीतिक दल को अपने बैनर/मंच का इस्तेमाल नहीं करने देने की अपनी नीति पर कायम है। इसके अलावा 15 जनवरी को राष्ट्रीय एसकेएम की बैठक होने वाली है, जिसमें ये तय किया जाएगा कि चुनाव में शामिल होने वाले संगठन और नेता संयुक्त किसान मोर्चा के अंदर रहेंगे या नहीं।

सूत्रों के मुताबिक एसकेएम बनाने वाली 32 यूनियनों में से 7 ने चुनाव से दूर रहने का फैसला किया है, लेकिन शेष 25 ने राजनीति में उतरने का फैसला किया है। जिन किसान संगठनों ने राजनीति से दूर रहने का फैसला किया है। उनमें कीर्ति किसान संघ, क्रांतिकारी किसान संघ, बीकेयू क्रांतिकारी, दोआबा संघर्ष समिति, बीकेयू सिद्धूपुर, किसान संघर्ष समिति और जय किसान आंदोलन संघ शामिल हैं। बैठक के दौरान इन सातों संगठनों ने अन्य से भी नीति का पालन करने और चुनाव से दूर रहने का आग्रह किया।

 

 

 

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