पंजाब के निजी क्षेत्र में कोटा कानून लागू होने से पहले उद्योगों ने किया विरोध

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पंजाब (Punjab) में सरकारी और निजी क्षेत्र में नौकरियोंका कोटा (Government and Private Sector Jobs) निर्धारित करने के लिए कानून लाने के ऐलान के बाद उद्योगों (Industries) ने इसका अभी से विरोध करना शुरू कर दिया है. उद्योगपतियों का कहना है कि राज्य के पहले ही उद्योग संकट से गुजर रहे हैं यदि यह कानून लाया जाता है तो इसका क्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा. ऑल इंडस्ट्रीज एंड ट्रेड फोरम (All Industries & Trade Forum) के राष्ट्रीय अध्यक्ष बदीश जिंदल (Badish Jindal) ने कहा कि प्रवासी कार्यबल (Workforce) मेहनती और तकनीकी रूप से कुशल है. यदि हमें स्थानीय लोगों को काम पर रखने के लिए कहा जाता है, तो हमें कुशल श्रमिक (Skilled Workers) नहीं मिल सकते हैं.

दि ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक उद्योग के प्रतिनिधियों ने तर्क दिया कि प्रस्तावित कानून उनके विकास के लिए प्रतिगामी होगा क्योंकि वे प्रवासी श्रमिकों पर बहुत अधिक निर्भर हैं, जो उनके कुल कार्यबल का 70-80 प्रतिशत है. पंजाब में दुकानों सहित लगभग 20 लाख का पंजीकृत औद्योगिक कार्यबल है. प्रतिनिधियों के अनुसार ऐसे समय में जब उद्योग को निवेश के प्रति आकर्षित करने की जरूरत है, उन पर इस तरह के प्रतिबंध लगाना हानिकारक साबित होगा. उन्होंने कहा कि आरक्षण ने हमेशा उत्पादकता को प्रभावित किया और प्रतिस्पर्धात्मकता को कम किया है.

ऑल इंडस्ट्रीज एंड ट्रेड फोरम के राष्ट्रीय अध्यक्ष बदीश जिंदल ने कहा कि यह कानून काम नहीं करेगा. हम इसका विरोध करने जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि लुधियाना, जालंधर और अमृतसर जैसे औद्योगिक शहरों में 70-80 प्रतिशत कार्यबल पूर्वांचल से है. हम इस कार्यबल के बिना टिके नहीं रह सकते हैं और यह अंततः इकाइयों को बंद करने की ओर ले जाएगा. बादीश नं कहा कि उद्योग पहले ही महसूस कर रहे हैं कि स्थानीय कार्यबल की भारी कमी है, जो प्रवासियों के यहां आने प्राथमिक कारण था. उन्होंने कहा कि नीति कुछ उद्योगों को स्थानांतरित करने और मौजूदा उद्योगों को विस्तार से हतोत्साहित करने के लिए मजबूर कर सकती है.

लुधियाना हैंड टूल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एससी रल्हन का कहना है कि अपर्याप्त कौशल वाले लोगों को काम पर रखना उद्योग के लिए विनाशकारी साबित होगा. उद्योग संघों को लगता है कि कानून सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को प्रभावित करेगा जो अभी भी महामारी के कारण लॉकडाउन के गंभीर प्रभाव से बाहर आ रहे हैं. सुपरफाइन निटर्स लिमिटेड के एमडी अजीत लकड़ा ने कहा कि प्रवासी श्रमिकों को स्थानीय लोगों के साथ बदलना व्यावहारिक रूप से असंभव है क्योंकि पूर्व में उनके कार्यबल का लगभग 80 प्रतिशत शामिल है.

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