पंजाब विधानसभा चुनावों के लिए BJP की खास रणनीति

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कृषि कानूनों को लेकर भले ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) किसानों के निशाने पर हो, लेकिन पंजाब में वर्ष 2022 को लेकर भाजपा ने उन सीटों को चिन्हित किया है जहां पर हिंदू और दलित आबादी 60 फीसद से अधिक है। भाजपा यह मान रही है कि 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले अगर कृषि कानूनों को लेकर केंद्र सरकार कोई बदलाव नहीं करती है तो उन्हें इन्हीं परिस्थितियों में चुनाव मैदान में उतरना पड़ेगा। ऐसे में उसने अपना फोकस 73 ऐसी सीटों पर फोकस करना शुरू कर दिया है, जहां पर हिंदू और दलित की आबादी अधिक है।

पार्टी का मानना है कि इन सीटों पर फोकस करके वह विधानसभा चुनाव में बड़ा उलटफेर कर सकती है। भाजपा की नजर उन 45 सीटों पर है, जहां पर हिंदू आबादी 60 फीसद से अधिक है और इन पर किसान आंदोलन का कोई खास असर नहीं है। उलटा यहां की आबादी किसान आंदोलन की वजह से उत्पन्न हुए हालातों से नाराज भी है, जबकि 28 ऐसी सीटें है जहां पर हिंदू और दलित की आबादी 60 फीसद से अधिक है।

भाजपा दलित बहुल सीटों को लेकर इसलिए भी उत्साहित है क्योंकि जब से पार्टी ने दलित मुख्यमंत्री बनाने की घोषणा की है तब से दलित समाज में भाजपा के प्रति झुकाव देखने को मिल रहा है। बड़ी संख्या में दलित नेता व दलित समाज भाजपा से जुड़ रहा है। यही कारण है कि भाजपा ने 28 ऐसी सीटों पर फोकस करना शुरू किया है।

भाजपा की परेशानी यह है कि किसान संगठनों के विरोध के कारण पार्टी ग्रामीण सीटों पर अपना जनसंपर्क नहीं कर पा रही है। वहीं, अकाली दल के साथ गठबंधन टूटने के बाद भाजपा दो दशक से ज्यादा समय के बाद अकेले दल में चुनाव लड़ने जा रही है। गठबंधन में रहते हुए भाजपा 23 सीटों पर ही चुनाव लड़ती रही है। जब अकाली दल के साथ जब भाजपा का गठबंधन था तो शहरी क्षेत्रों को भाजपा और ग्रामीण क्षेत्रों को अकाली दल संभालती थी।

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