किसान बोले- कृषि कानून वापस होना बड़ी राहत, पर मारे गए साथियों की याद सिहरन पैदा करती रहेगी

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भले ही प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) द्वारा शुक्रवार को तीन कृषि कानूनों को निरस्त (repeal three agriculture laws) करने का ऐलान पंजाब में एक बड़ी राहत और खुशी लेकर आया है, लेकिन किसानों (farmers) का कहना है कि आंदोलन में मारे गए 600 से ज्यादा साथियों का दुख लाखों आंदोलनकारियों में लंबे समय तक सिहरन (shivering among crores of farmers) पैदा करता रहेगा. सबसे बड़े संघर्षों में से एक को संगठित करने में सबसे आगे रहे किसान संघों का कहना है कि यह उनके लिए एक बड़ी जीत है, क्योंकि सरकार को उनकी मांगों को मानने के लिए मजबूर किया गया है, राज्य में किसानों को राहत मिली है. संघ के नेता कहते हैं कि तीन कानूनों के माध्यम से संभावित आर्थिक खतरा (economic threat) खत्म हो गया है.

संयुक्त किसान मोर्चा (United Kisan Morcha) के वरिष्ठ नेता दर्शन पाल (Darshan Pal) ने एक बयान में कहा, ‘हमें अपने एकजुट संघर्ष की जीत पर गर्व है. सरकार को झुकना पड़ा और कानूनों को निरस्त करना पड़ा. लेकिन हमें दुख है कि लंबे अरसे के बाद कानूनों को वापस लिए जाने के ऐलान से पहले सैकड़ों लोगों की जान चली गई.’ कीर्ति किसान यूनियन के उपाध्यक्ष राजिंदर सिंह दीप सिंह वाला ने विकास को देश के संघर्षरत किसानों के लिए एक बड़ी जीत बताते हुए कहा, ‘यह केवल एक संयुक्त संघर्ष शुरू करने के कारण था कि वे केंद्र से कानूनों को रद्द करवाने में कामयाब रहे.’ उन्होंने कहा कि केंद्र से एमएसपी पर आश्वासन सहित सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए जल्द ही एसकेएम की एक बैठक होगी.

द ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट के मुताबिक जारी संघर्ष में अब तक 665 किसान अपनी जान गंवा चुके हैं. हाल ही में पंजाब विश्वविद्यालय से जुड़े अर्थशास्त्रियों द्वारा किए गए एक अध्ययन में मृतक किसानों की आर्थिक रूपरेखा तैयार की गई और इसमें पाया गया कि मरने वालों में ज्यादातर छोटे और सीमांत किसान थे. अर्थशास्त्री लखविंदर सिंह, पंजाबी विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर और विश्वविद्यालय के तलवंडी साबो परिसर में सहायक प्रोफेसर बलदेव सिंह शेरगिल के अध्ययन ने निष्कर्ष निकाला है कि मृतक किसानों की औसत भूमि का आकार 2.94 एकड़ है. यदि भूमिहीन किसानों जिन्होंने अनुबंधित भूमि पर खेती की, उसे ध्यान में रखा जाए, तो मृतक की जोत का औसत आकार घटकर 2.26 एकड़ रह जाता है.

नाभा के पास बिंबर गांव के किसान गुरबख्शीश सिंह ने बताया कि उनके जैसे किसान कानूनों को रद्द करने के फैसले से बहुत खुश हैं. उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करेगा. घोषणा पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए राज्य के कृषि मंत्री रणदीप सिंह नाभा ने कहा कि तीन कानूनों को वापस लेने के केंद्र सरकार के फैसले का स्वागत है. नाभा ने कहा कि मैं किसानों की लंबे समय से चली आ रही मांग को सुनने के लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद देता हूं. मैं यह भी मांग करता हूं कि केंद्र सरकार विरोध के दौरान मारे गए किसानों के परिवारों को मुआवजा दे.

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