दिवाली पर व्हाइट शुगर की जगह इस्तेमाल करें ब्राउन शुगर, जानें दोनों का अंतर

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Diwali Sweets: दिवाली (Diwali) के त्योहार के इन पांच दिनों में हर दिन ही पकवान बनाये जाते हैं. इनमें से मीठी चीजों को तैयार करने में ज्यादातर सफ़ेद चीनी (White sugar) का ही इस्तेमाल किया जाता है. ऐसे में अगर आप खुद को मीठा खाने से नहीं रोक सकते हैं. तो आपको इन मीठे पकवानों  यानी स्वीट डिशेज को बनाने के लिए सफ़ेद चीनी की जगह ब्राउन शुगर (Brown sugar) का इस्तेमाल करना चाहिए. दरअसल इन दोनों तरह की शुगर में काफी अंतर होता है. जिसके बारे में जानना आपके लिए जरूरी है. तो आइये जानते हैं कि व्हाइट शुगर और ब्राउन शुगर में क्या अंतर होता है और सेहत के लिहाज से कौन सी शुगर बेहतर होती है.

व्हाइट शुगर और ब्राउन शुगर में अंतर

व्हाइट शुगर और ब्राउन शुगर दोनों ही तरह की चीनी को गन्ने के रस से तैयार किया जाता है. दोनों ही तरह की चीनी को तैयार करने में तरीका भी लगभग एक सा ही अपनाया जाता है. लेकिन दोनों में अंतर ये होता है कि ब्राउन शुगर को तैयार करने में गुड़ की कुछ मात्रा इसमें मिलायी जाती है. जिसकी वजह से इसका रंग ब्राउन हो जाता है. दोनों के बीच स्वाद का अंतर भी होता है. ब्राउन शुगर का फ्लेवर आपको कैरेमल और टॉफी में मिलता है. जबकि सफेद चीनी ज्यादा मीठी होती है और जिसका इस्तेमाल केक और पेस्ट्री, मिठाइयां बनाने के लिए किया जाता है. आमतौर पर घरों में भी व्हाइट शुगर का इस्तेमाल ही किया जाता है.

ब्राउन शुगर

ब्राउन शुगर गुड़ का ही एक शुद्ध रूप होता है इसलिए इसमें कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं और ये सेहत के लिहाज से बेहतर मानी जाती है. ब्राउन शुगर में कैलोरी कम होती है. लेकिन विटामिन बी, आयरन, पोटैशियम, और कैल्शियम जैसे कई पोषक तत्व काफी मात्रा में होते हैं. साथ ही ब्राउन शुगर को तैयार करने में किसी भी तरह के कैमिकल का इस्तेमाल नहीं किया जाता है. ब्राउन शुगर खाने से आपकी सेहत कई तरह के फायदे हो सकते हैं. ये वजन कम करने में मदद कर सकती है, पाचन को दुरुस्त रखती है, पीरियड में होने वाली ऐंठन को कम करती है, स्किन को बेहतर बनाने सहित कई और फायदे भी हेल्थ को देती है

व्हाइट शुगर

व्हाइट शुगर यानी सफेद चीनी में कैलोरी की मात्रा ज्यादा होती है. साथ ही इसमें  किसी भी तरह के पोषक तत्व नहीं होते हैं. सफेद चीनी को तैयार करते समय इसमें सल्फर जैसे कैमिकल का इस्तेमाल किया जाता है. ये वजन को बढ़ाने का काम करती है, मेटाबॉलिज्म पर खराब असर डालती और डाइबिटीज व लिवर की परेशानी को आमंत्रित करती है. ये स्वाद में ज्यादा मीठी होती है और सेहत के लिए बेहतर नहीं मानी जाती है.

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