बिजली लोगों की मौलिक जरूरत, इससे किसी को भी वंचित नहीं कर सकते; हाईकोर्ट ने महिला के हक में दिया फैसला

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World wide City Live, (आँचल) : बिजली को लोगों की मौलिक जरूरत बताते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि इससे किसी को वंचित नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने करीब एक साल से बगैर बिजली के रह रही महिला के हक में फैसला देते हुए यह टिप्पणी की है। हाईकोर्ट ने बिजली वितरण कंपनी को महिला के घर में उसके पति के अनापत्ति प्रमाणपत्र के बगैर बिजली कनेक्शन लगाने का आदेश दिया है। वह महिला पति से अलग रह रही है।

जस्टिस मनोज कुमार ओहरी ने हाल ही में पारित फैसले में ‘सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि कानून के स्थापित मानदंड के अनुसार, बिजली लोगों की मौलिक जरूरत है। इससे किसी को वंचित नहीं किया जा सकता। साथ ही हाईकोर्ट ने टाटा पावर दिल्ली वितरण लिमिटेड (टीपीडीडीएल) को महिला के घर में बिजली का मीटर/कनेक्शन लगाने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने टीपीडीडीएल को आदेश दिया है कि बिजली कनेक्शन देने के लिए महिला के पति की ओर से अनापत्ति प्रमाण पत्र की मांग नहीं करे।

महिला ने वकील प्रदीप खत्री ने हाईकोर्ट में कहा था कि संबंधित मकान में महिला अपने बीमार बेटे के साथ रहती है। पिछले साल उसका पति उसे छोड़कर अलग रहने लगा है। वकील ने बताया कि उनका मुवक्किल यानी याचिकाकर्ता महिला भी मकान की हिस्सेदार है। कोर्ट को बताया गया कि जब महिला ने बिजली कनेक्शन के लिए कंपनी से संपर्क किया तो पति से आनपत्ति प्रमाण पत्र के बगैर कनेक्शन देने से इनकार कर दिया।

कनेक्शन दे टीपीडीडीएल अदालत

हाईकोर्ट ने टीपीडीडीएल को महिला के नाम संबंधित मकान में बिजली का कनेक्शन देने का आदेश दिया है। याचिकाकर्ता महिला को भी कोर्ट ने कंपनी में आवेदन करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कंपनी को बगैर एनओसी के कनेक्शन देने का निर्देश दिया। साथ ही महिला को बिजली कनेक्शन के लिए 10 हजार रुपये की अतिरिक्त सुरक्षा राशि जमा कराने का आदेश दिया है। हालांकि, स्पष्ट कर दिया गया है कि यदि महिला बिजली का बिल जमा करने में विफल रहती है तो कंपनी कनेक्शन काटने के लिए स्वतंत्र है।

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