देशभर में अभी और सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल, कीमतों में भारी गिरावट की उम्मीद, जानिए पूरा मामला

0

देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अभी और गिरावट हो सकती है. पेट्रोलियम एक्सपर्ट नरेंद्र तनेजा की मानें तो आने वाले दिनों में कच्चे की तेल की कीमतों में लगातार कमी देखने को मिलती रहेगी. इसका सीधा मतलब ये है कि क्रूड ऑयल की कीमतें अभी लगातार कम होंगी. रसोई गैस की कीमत में पिछले महीने हुए इजाफे के बाद अगले महीने इसके दाम में इजाफे के अंदेशे को खारिज करते हुए तनेजा ने कहा कि अब माहौल बदलने लगा है. इसलिए अब इसकी कीमतों में बढ़ोतरी नहीं बल्कि कमी आने की संभावना बन रही है.

पिछले कुछ दिनों में क्रूड ऑयल की कीमत 85 डॉलर प्रति बैरल से गिरकर 78 डॉलर प्रति बैरल हो गई. तनेजा ने इस पर कहा कि अब इसकी कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से भी कम होने का इंतजार किया जा रहा है. उन्होंने इसके लिए दो प्रमुख कारण बताए हैं. नरेंद्र तनेजा के मुताबिक इन दो बड़े कारणों में सबसे बड़ा कारण ग्लास्गो में पिछले दिनों हुई बैठक में सभी देशों की बढ़ती पेट्रोल-डीजल की कीतमों पर चिंता जताना और उसी बैठक में भविष्य में इंधन के वैकल्पिक प्रयोग पर चर्चा होना भी शामिल है.

ईंधन के महंगे दाम की वजह से इलेक्ट्रिक वाहनों पर जोर

ईंधन की महंगी कीमतों के कारण सभी देशों ने अपने यहां इलेक्ट्रिक गाड़ियों को बढ़ावा देने और दूसरे विकल्प तैयार करने पर जोर दिया. इसका परिणाम यह रहा कि तेल उत्पादक देशों को यह बात समझ में आ गई कि अगर यही हालात रहे तो दूसरा विकल्प इन देशों के कच्चे तेल के लिए घातक साबित होगा और निश्चित रूप से व्यापार भी प्रभावित होगा. इसलिए उन्होंने तेल की कीमतों को धीरे-धीरे कम करना शुरु कर दिया है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बातचीत के दौरान कच्चे तेल की कीमतों को कम करने के लिए कहा था. इसके लिए उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से बातचीत कर इस दिशा में कदम उठाने के लिए रिक्वेस्ट भी की थी.

कच्चे तेल के दाम कम करने के लिए अमेरिका भी बढ़ा रहा है दबाव

दूसरा सबसे बड़ा कारण अमेरिकी दबाव है. अमेरिका की सत्ता जब से जो बाइडेन के हाथों में आई है, वहां पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तकरीबन 60 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो चुकी है. इतना ही नहीं, अमेरिका में मंहगाई दर भी 6 फीसदी तक पहुंच चुकी है. अमेरिका के ज्यादातर लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट के मुकाबले अपनी गाड़ियों पर ही निर्भर रहते हैं. ऐसे में अमेरिका के लोगों ने महंगे ईंधन को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति पर दबाव बनाना शुरू कर दिया.

राष्ट्रपति जो बाइडेन भी इस बात को अच्छी तरह से जानते हैं कि महंगे ईंधन को लेकर देशवासियों द्वारा बनाया जा रहे दबाव में कुछ भी असाधारण नहीं है. यही वजह है कि बाइडेन ने भी क्रूड ऑयल की कीमत कम करने के लिए अपनी सारी शक्ति लगा चुके हैं.

अमेरिका में अगले साल होने हैं संसदीय चुनाव

कच्चे तेल की कीमतों को लेकर जो बाइडेन सऊदी अरब, इराक समेत दूसरे खाड़ी देशों के साथ-साथ ओपेक पर भी दबाव बढ़ा चुके हैं. इसका ही यह परिणाम है. बताते चलें कि अमेरिका में अगले साल संसदीय चुनाव भी हैं. पेट्रोल-डीजल की कीमतों का इजाफा सबसे बड़ा मुद्दा बन सकता है. अगर पार्टी की हार होती है तो जो बाइडेन के लिए साल 2024 में दूसरी बार राष्ट्रपति बनने का रास्ता बंद हो जाएगा. इसलिए कच्चे तेल की कीमतों को 70 डॉलर प्रति बैरल से नीचे या उसके आसपास रखने के लिए दबाव बना हुआ है

News Website in Jalandhar
News Website in Jalandhar
News Website in Jalandhar

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here